मधेपुरा के चौसा में भाई की सलामती के लिए मनाए जाने वाले कर्मा-धर्मा त्योहार के दिन ही उठी चार बहनों की अर्थी

मधेपुरा के चौसा में भाई की सलामती के लिए मनाए जाने वाले कर्मा-धर्मा त्योहार के दिन ही उठी चार बहनों की अर्थी

कुश काटने गई चार लड़की समेत 5 बच्चों की डूबने से मौत से गांव में मातम
मधेपुरा । बहनों के द्वारा भाई की सलामती के लिए मनाए जाने वाले कर्मा-धर्मा पर्व के दिन ही चार बहनों की अर्थी उठने से प्रखंड क्षेत्र के मनोहरपुर गांव में मातम पसर गया है। गांव की हर आंखें नम है। बताया गया कि कुश काटनेे से पहले झूर को आमंत्रण दिया जाता है। यह आमंत्रण खासकर बहनें ही देतीं है। झूर को आमंत्रण के लिए मुहल्ले के सात बच्चे चांप की ओर गए थे। इसी क्रम में सातों बच्चे चांप के पानी में डूब गए। शोर मचाने पर कुछ दूसरे बच्चे पानी में डूब रहे उन बच्चों को बचाने के लिए पहुंचे। 
उनलोगों ने किसी तरह दो बच्चों को पानी से बाहर निकाल लिया। लेकिन गहरे पानी में डूबने से अरजपुर पश्चिमी पंचायत के ही वार्ड संख्या दो निवासी महेश्वर भगत की पुत्री लक्ष्मी कुमारी (11 वर्ष), इसी गांव के मुकेश ठाकुर की पुत्री नैन्सी कुमारी (12 वर्ष), चन्द्रशेखर ठाकुर की पुत्री ललिता कुमारी (10 वर्ष), विभाष ठाकुर की पुत्री अस्मिता कुमारी (9 वर्ष) और गोपी भगत के पुत्र कृष्ण कुमार (10 वर्ष) की मौत मौत हो गई। एक ही गांव के एक लड़का सहित पांच बच्चियों की मौत ने गांव वालों को झकझोड़ कर रख दिया। बताया गया कि डूबने के दौरान सभी बच्चों ने एक-दूसरे को बचाने प्रयास भी किया, लेकिन दो बच्चों को अन्य कोई नहीं बच पाया।

बुझी गेले घरो के चिराग, आब केना रहबे हो 
मृतक कृष्णा की मां अनीता देवी और लक्ष्मी की मां मीरा देवी की चीत्कार को सुनकर आसपास के लोगों की आंखें नमः हो गई। कृष्णा की मां बार-बार एक ही रट लगाए हुए थीं। हो बाबू अब हम केना रहबे हो, घरो के चिराग बुझी गले हो। हमारा बेटा के की भे गले हो, भगवान कौन जन्म के सजा देल्हो हो। बताया गया कि मृतका नैंसी पांच बहन व एक भाई है। वहीं लक्ष्मी तीन भाई व दो बहन, कृष्णा भाई में अकेला था। जबकि उसके चार सौतेले भाई और एक बहन है। इसी तरह ललिता चार बहन व एक भाई तथा अस्मिता एक बहन व दो भाई थीं।
घटना की जानकारी मिलते ही जदयू प्रखण्ड अध्यक्ष मनोज प्रसाद, मुखिया प्रतिनिधि सुबोध सुमन, जाप कार्यकर्ता रितेश रंजन समेत अन्य जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता ने घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि सभी मृतक के परिजन गरीब तबके हैं। इन सभी को सरकारी सहायता का लाभ मिलना चाहिए, ताकि बच्चे के दाह संस्कार व क्रिया कर्म में परिजन को कुछ राहत मिल सके। वहीं, सीओ राकेश कुमार सिंह ने कहा कि मृतकों के आश्रित को चार-चार लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा।

पिछले साल बिहारीगंज में 4 बच्चियों की हुई थी मौत
बिहारीगंज प्रखंड के लक्ष्मीपुर लालचंद पंचायत के अररिया गांव में पिछले साल 29 अगस्त को भी कर्मा-धर्मा पर्व को लेकर झाबुआ का फूल निकालने के दौरान चार बच्चों की डूबने से मौत हो गई थी। जबकि एक बच्ची सपना को बचा लिया गया था। आज फिर इस पर्व के आने पर वह उदास थी। एक साल पूर्व अपनी सहेलियों को खोने के कारण वह इस बार पर्व नहीं मनाई। सपना ने बताया कि वह सात-आठ सहेली झाबुआ का फूल तोड़ने गब्बी में गई थीं। जहां गहरे पानी मे पांच सहेली डूबने लगे। जबतक में उनलोगों को बाहर निकाला जाता, चार बच्चियों की मौत हो चुकी थी।